Thursday, October 28, 2010




कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर न हो
मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर न हो

वो बड़ा रहीमो-करीम है, मुझे ये सिफ़त भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो

मेरे बाज़ुओं में थकी-थकी, अभी महवे- ख़्वाब है चाँदनी
न उठे सितारों की पालकी, अभी आहटों का गुज़र न हो

ये ग़ज़ल है जैसे हिरन की आँखों में पिछली रात की चाँदनी
न बुझे ख़राबे की रौशनी, कभी बे-चिराग़ ये घर न हो

कभी दिन की धूप में झूम कर, कभी शब के फूल को चूम कर
यूँ ही साथ-साथ चले सदा, कभी ख़त्म अपना सफ़र न हो

मेरे पास मेरे हबीब आ, ज़रा और दिल के करीब आ
तुझे धड़कनों में बसा लूँ मैं, कि बिछड़ने का कभी डर न हो



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मिलकर जुदा हुए तो ..(जगजीत-चित्रा)





ALBUM - MILESTONE

मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम,

आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर,
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम,

जब दूरियों की याद दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम,

गर दे गया दगा हमें तूफ़ान भी ‘क़तील’,
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम,



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Wednesday, October 27, 2010

तुम हमारे नहीं तो क्या गम है



तुम हमारे नहीं तो क्या गम है, हम तुम्हारे तो हैं यह क्या कम है

मुस्करा दो जरा खुदा के लिये, शमे महफ़िल मे रोशनी कम है

तुम हमारे नही तो क्या गम है, हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है

बन गया है यह जिन्दगी अब तो, तुझ से बढ कर हमे तेरा गम है

तुम हमारे नही तो क्या गम है,हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है



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