
बाद मुद्दत उन्हें देख कर यूँ लगा
जैसे बेताब दिल को क़रार आ गया
आरज़ू के गुल मुस्कुराने लगे
जैसे गुलशन में बहार आ गया
तिशना नज़रें मिली शोख नज़रों से जब
मए बरसने लगी जाम भरने लगे
साक़िया आज तेरी ज़रूरत नहीँ
बिन पिय बिन पिलाए खुमार आ गया
रात सोने लगी सुबह होने लगी
शम्मा बुझने लगी दिल मचलने लगे
वक़्त की रोशनी में नहाई हुई
ज़िंदगी पे अजब सा निखार आ गया
- सुदर्शन 'फकीर'




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